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भेल की जमीन पर एक लाख लोगों को रोजगार देने का सरकार ने बनाया प्लान

 भोपाल : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कारखाना स्थापना के बाद से अब तक भारत हेवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड धीरे-धीरे अपना कारोबार समेट चुका है। कर्मचारियों से लेकर प्रॉडक्शन तक 25 फीसदी से भी कम रह गया है। ऐसे में यदि भेल प्रबंधन अपनी अनुपयोगी जमीन राज्य सरकार को वापस कर दे तो उद्योग विभाग यहां एक लाख लोगों को रोजगार देने की महती योजना को अंजाम दे सकता है।

राजस्व विभाग के आदेश पर पिछले वर्ष  भोपाल कलेक्टर भेल को दी गई छह हजार एकड़ जमीन में से अनुपयोगी पड़ी 1161 एकड़ जमीन वापस राजस्व विभाग के नाम से दर्ज कर चुके है लेकिन भेल प्रबंधन इस पर हाईकोर्ट से स्टे ले चुका है। भेल भोपाल की जमीन वापस नहीं देना चाहता है। इसके चलते राजधानी भोपाल का औद्योगिक विकास अटक गया है।

भेल यदि राज्य सरकार को जमीन वापस करे तो यहां एक लाख लोगों को रोजगार देने के लिए नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्लान तैयार  है। औद्योगिक नीति निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला का कहना है कि गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र से लगी हुई भेल की जमीन है। यदि यह जमीन मध्यप्रदेश को वापस मिल जाए तो यहां सूचना र्प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, तकनीकी सेवाओं, स्टार्ट अप, एप आधारित सेवाएं, एजूकेशन, बॉयोटेक्नालॉजी आधारित उद्योग, नालेज आधारित सेवाएं जिनमें बिल्डिंग में बैठकर काम करना होता है। इन्हें शुरु करने का प्लान तैयार है। इसमें एक से डेढ़ लाख युवाओं को रोजगार मिल सकता है। जमीन मिल जाए तो डिटेल प्लान भी हम तैयार करेंगे।

प्रमुख सचिव राजस्व के निर्देश पर  भेल की रिक्त पड़ी 1161 एकड़ जमीन राजस्व विभाग के नाम पर कलेक्टर ने दर्ज कर दी थी लेकिन भेल ने इस पर हाई कोर्ट से स्टे ले लिया हे।  कोर्ट में भेल को स्टे इस आधार पर मिला है कि जमीन दिए जाने के लिए केन्द्र सरकार और भेल के बीच अनुबंध हुआ था ऐसे में राज्य सरकार केन्द्र की अनुमति के बिना यह जमीन वापस नहीं ले सकती है। इधर राजस्व विभाग और जिला प्रशासन कोर्ट में यह जवाब पेश कर चुका है कि कंपनी को जमीन नि:शुल्क दी गई थी। उसका प्रीमियम और भू भाटक भी राज्य शासन ने ही भरा था। केन्द्र और राज्य के बीच इस जमीन को लेकर कोई अनुबंध नहीं हुआ था। भेल प्रबंधन भी वर्ष 2002 में राज्य शासन को लिखकर दे चुका है कि खाली पड़ी तीन हजार एकड़ जमीन शासन वापस लेकर उसकी राशि वापस कर दे।

कांग्रेस की कैलाशनाथ काटजू सरकार के कार्यकाल में वर्ष 1959 से 1962 के बीच भेल को 6045 एकड़ जमीन नि:शुल्क आबंटित की गई थी। इसमें से चार हजार एकड़ जमीन पर कारखाना और आवासीय परिसर बनाया गया था। दो हजार एकड़ जमीन शुरु से ही खाली पड़ी है। इसमें से 764.5 एकड़ से अधिक जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है।

भोपाल के एसडीएम हुजूर आकाश श्रीवास्तव का कहना है कि भेल की जो अनुपयोगी जमीन राजस्व विभाग के नाम पर दर्ज की गई है उस पर भेल ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है। स्टे वेकेट कराने और अर्ली हियरिंग के लिए प्रशासन का प्रस्ताव कोर्ट में लगा हुआ है।

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