इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी है। रिपोर्ट 600 से अधिक पन्नों की बताई जा रही है और इसे फिलहाल सीलबंद रखा गया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने और इसे सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई। हालांकि, अदालत ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं दी। संबंधित पक्षों के वकीलों को प्रधान रजिस्ट्रार के पास रिपोर्ट का निरीक्षण करने की अनुमति दी गई है। अगली सुनवाई 8 सितंबर को निर्धारित की गई है।
भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए थे और कई लोगों की मौत हुई थी। न्यायिक आयोग को दूषित पानी के कारणों, प्रभावित लोगों की संख्या, प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तथा घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच का जिम्मा दिया गया था।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इंदौर के कुछ हिस्सों में अभी भी दूषित पानी की शिकायतों को गंभीरता से लिया। अदालत ने नगर निगम से पूछा कि प्रभावित इलाकों में साफ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। नगर निगम ने पानी के नमूनों की जांच कराने की जानकारी दी और रिपोर्ट जल्द अदालत के समक्ष पेश करने की बात कही।
अब इस मामले में सभी की नजर न्यायिक जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों और आगे होने वाली सुनवाई पर है। रिपोर्ट के आधार पर घटना की जिम्मेदारी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों पर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आने की उम्मीद है।

0 comments:
Post a Comment