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मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में दाल चढ़ाने की अनोखी परंपरा

 मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में दाल चढ़ाने की अनोखी परंपरा 
हम सभी ने भगवान शिव के मंदिर में उन्हें दूध, बेलपत्र, शहद, गंगाजल और पानी चढ़ाते हुए तो देखा होगा, लेकिन क्या कभी किसी शिव मंदिर में दाल चढ़ाते किसी को देखा है?




चौकिए मत मध्य प्रदेश की तीर्थ नगरी कहा जाने वाला ओंकारेश्वर अपने धार्मिक महत्व और आस्था के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। इस नगरी में स्थित है ऋणमुक्तेश्वर महादेव का मंदिर जो देश के अन्य शिव मंदिरों से थोड़ा अलग है।
मध्य प्रदेश का ऋणमुक्तेश्वर मंदिर

इस मंदिर में भगवान शिव के शिवलिंग को दूध, बेलपत्र और गंगाजल के अलावा दाल भी चढ़ाई जाती है। ऋणमुक्तेश्वर मंदिर को लेकर मान्यता है कि, यहां सच्ची श्रद्धा के साथ दाल चढ़ाने से व्यक्ति को कर्ज से मुक्ति मिलने के साथ जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नर्मदा नदी के तट पर बसे इस प्राचीन मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। खासकर सोमवार, शिवरात्रि और धार्मिक उत्सवों के मौके पर यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। मंदिर में दर्शन करने से पहले भक्त नर्मदा नदी में स्नान करते हैं, और इसके बाद ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में प्रवेश कर उन्हें चने की दाल अर्पित करते हैं।

महाभारत काल से जुड़ा है मंदिर का इतिहास 
भगवान शिव का ऋणमुक्तेश्वर मंदिर का इतिहास पांडव काल से जुड़ा है। अज्ञातवास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने ऋण से मुक्ति पाने के लिए ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की थी। जब अज्ञातवास खत्म हुआ तो, यहां आकर सभी पांडवों ने भगवान का आभार जताया था।

उसी परंपरा का अनुसरण करते हुए इस मंदिर में आने वाले भक्त शिवलिंग पर चने की दाल अर्पित करते हैं। मंदिर की यही खासियत इसे अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाती है। माना जाता है कि, दाल चढ़ाने की परंपरा कोई आज की नहीं बल्कि अनादिकाल से चली आ रही है।

ऋणमुक्तेश्वर मंदिर से जुड़ी प्रचलित मान्यता
ऋणमुक्तेश्वर मंदिर में भगवान शिव को दाल चढ़ाने के पीछे एक प्रचलित मान्यता यह भी है कि, ऋणमुक्तेश्वर मंदिर देवताओं के गुरु कहे जाने बृहस्पति का निवास स्थान है। भगवान शिव ने यहां सभी को अलग-अलग स्थान दिया था, जिसमें बृहस्पति को ऋणमुक्तेश्वर मंदिर स्थान दिया गया।

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