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तीन तारीखों पर बन रहे दुर्लभ संयोग, तीसरा सोमवार होगा खास

dharm-भगवान शिव की आराधना के सबसे पवित्र श्रावण मास की शुरुआत 30 जुलाई गुरुवार से हो रही है, जो 28 अगस्त शुक्रवार यानी रक्षाबंधन तक रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल सावन पूरे 30 दिन का होगा, जिसमें भक्तो को व्रत और पूजा-अर्चना के लिए 4 सोमवार(Sawan Somwar) मिलेंगे। इस पूरे माह शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष प्रभाव रहेगा। वहीं गुरु पूर्णिमा तिथि बुधवार की शाम तक रहने से कई शिवालयों में शाम से ही रुद्राभिषेक प्रारंभ हो गए।




सावन सोमवार को शिवालयों में होगी विशेष पूजा
श्रावण सोमवार पर महादेव की विशेष पूजा-अर्चना होगी। ज्योतिषाचार्य  के मुताबिक श्रवण नक्षत्र में शुरू होने वाले सावन मास में अच्छी वर्षा के कई योग भी बनेंगे। सावन मास की शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी और इस तरह पूरे महीने मंदिरों में भगवान शिव की विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और श्रृंगार होंगे।

09 अगस्त (रविवार -एकादशी) इस दिन गुरु ग्रह का उदय होगा और साथ ही मृगशिरा नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बनेगा। यह योग सर्वत्र बेहतरीन वर्षा कराएगा, लेकिन कुछ चुनिंदा जगहों पर अतिवृष्टि (मूसलाधार बारिश) से भारी नुकसान के संकेत भी मिल रहे हैं।

12 अगस्त: श्रावण मास के दौरान आर्द्रा नक्षत्र में मंगल ग्रह का प्रवेश होगा, जो क्षेत्र में झमाझम और भरपूर बारिश का मजबूत कारक बनेगा।

15 अगस्त : स्वतंत्रता दिवस पर अश्लेषा नक्षत्र में बुध ग्रह का प्रवेश सबसे खतरनाक और भारी वर्षा कारक योग माना जा रहा है। इसके प्रभाव से कई इलाकों में बाढ़ और भयंकर जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे जन-धन की हानि का भी अंदेशा है।
तीसरे सोमवार क्यों होगा खास?

पूरे 30 दिन के इस सावन में चार सोमवार पड़ेंगे, लेकिन इनमें दो सोमवार खास रहने वाले हैं। 10 अगस्त को सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का संयोग रहेगा, जबकि 17 अगस्त को तीसरे सावन सोमवार को नाग पंचमी (Nag Panchami) मनाई जाएगी। एक ही दिन शिव और नाग देवता की आराधना का संयोग होने से शिवालयों में विशेष रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, पार्थिव शिवलिंग पूजन और भजन-कीर्तन होंगे। श्रद्धालु पूरे महीने सोमवार व्रत रखकर भगवान शिव का गंगाजल, दूध, बेलफा, धतूरा और पंचामृत से अभिषेक करेंगे।

कांवड़ यात्राएं पहुंचेंगी
शिव मंदिरों में सोमवार को हरिद्वार, सोरो सहित अन्य तीर्थ स्थलों से कांवड़ यात्राएं पहुंचेंगी। महामृत्युंजय मंत्र के जाप के साथ ही भजन संध्या और जागरण होगा। श्रद्धालु भोलेनाथ को रिझाने के लिए बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी पत्र अर्पित करें।

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