भारत पर ये 3 महीने भारी, एक्सपर्ट ने बताया इसके बाद क्या होगा
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 (अप्रैल-मार्च) की पहली तिमाही में भारत के आर्थिक प्रदर्शन पर ग्लोबल झटकों का असर पड़ सकता है। लेकिन, यह टेम्परेरी होगा। मौजूदा अनिश्चितताओं के बावजूद देश की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की राह मजबूत बनी हुई है। 'कुछ अनिश्चितता तो है ही। लेकिन, मुझे लगता है कि अगर आप इस तिमाही के प्रदर्शन और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को देखें और अलग-अलग एजेंसियों के अनुमानों पर गौर करें तो यह साफ है कि भारत लंबे समय तक 6.5% से 7% से ज्यादा की दर से लगातार आगे बढ़ता रहेगा।'
लॉन्ग-टर्म ग्रोथ में आते रहते हैं उतार-चढ़ाव
रारा 'क्रेडिबल ग्रोथ: कैपिटल, एंटरप्रेन्योरशिप और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग' पर इंडस्ट्री की एक चर्चा के दौरान बोल रहे थे। इस चर्चा का फोकस बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शी फाइनेंशियल रिपोर्टिंग के जरिए निवेशकों का भरोसा बढ़ाने पर था।
उन्होंने कहा, 'बाहरी वजहों से हमें कुछ समय के लिए रुकावटों या ऐसे दौर का सामना करना पड़ सकता है जब ग्रोथ उस लेवल पर न हो। लेकिन, लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ऐसे ही काम करती है। उस दौरान उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।'
इस इवेंट में निवेशकों के नजरिए से 'क्रेडिबल ग्रोथ' (भरोसेमंद ग्रोथ) क्या है और लॉन्ग-टर्म कैपिटल को आकर्षित करने में गवर्नेंस फ्रेमवर्क की क्या अहमियत है, इस पर चर्चा की गई।

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