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अब्राहम समझौते को बढ़ाने की कोशिश में डोनाल्ड ट्रंप

 अब्राहम समझौते को बढ़ाने की कोशिश में डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील की है। ट्रंप चाहते हैं कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे देश अब्राहम समझौतों में शामिल हों। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ईरान के साथ तनाव कम करने और युद्ध रोकने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान ने ट्रंप के प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने भी डोनाल्ड ट्रंप की पोस्ट पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की।




पाकिस्तान ने कहा-कोई दबाव नहीं
रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इन देशों के नेताओं से फोन पर बात की है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान अमेरिका के साथ समझौता करता है, तो इन देशों का अब्राहम समझौते में शामिल होना एक ऐतिहासिक कदम होगा। लेकिन पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान के एक सूत्र ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत और इजरायल से संबंध सामान्य करने के मुद्दे अलग-अलग हैं। दोनों को जोड़ना सही नहीं है। सूत्र ने यह भी कहा कि पाकिस्तान किसी दबाव में आकर ऐसा फैसला नहीं करेगा।

सऊदी अरब के लिए संवेदनशील मुद्दा
सऊदी अरब के लिए इजरायल को मान्यता देना आसान फैसला नहीं माना जा रहा है। सऊदी अरब लंबे समय से कहता रहा है कि जब तक फिलिस्तीन को अलग देश बनाने का स्पष्ट रास्ता नहीं निकलता, तब तक वह इज़राइल से रिश्ते सामान्य नहीं करेगा। गाजा युद्ध के बाद मुस्लिम देशों में इजरायल के खिलाफ नाराजगी भी बढ़ी है। ऐसे में ट्रंप की अपील को तुरंत समर्थन मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि मिस्र, जॉर्डन और तुर्की के पहले से ही इजरायल के साथ राजनयिक संबंध हैं, लेकिन गाजा युद्ध के बाद इनमें तनाव बढ़ा है।

डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड पहले भी अपने कार्यकाल में अब्राहम समझौते को आगे बढ़ा चुके हैं। साल 2020 में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इज़राइल के साथ संबंध सामान्य किए थे। बाद में मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हुए। अब डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ संभावित समझौते को क्षेत्रीय शांति और नए गठबंधन से जोड़कर देख रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि इससे मध्य पूर्व में आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता बढ़ सकती है। वहीं कई विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह योजना जमीन पर लागू करना आसान नहीं होगा।

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