....

छत्‍तीसगढ़ में दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की हाईकोर्ट ने दी अनुमति

 छत्‍तीसगढ़ में दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की हाईकोर्ट ने दी अनुमति
हाई कोर्ट ने एक अत्यंत संवेदनशील मामले में ऐतिहासिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए एक दुष्कर्म पीड़िता को उसके 14-16 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पीड़िता पर उस गर्भ को रखने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता, जो उसकी सहमति के बिना और क्रूरता के फलस्वरूप ठहरा हो।




यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ द्वारा रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया। पीड़िता की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। याचिकाकर्ता कुछ महीने पहले जबरन शारीरिक संबंध की शिकार हुई थी। इस कृत्य के कारण वह गर्भवती हो गई।

पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी कि यह गर्भ उसे गहरा मानसिक आघात और सामाजिक अपमान पहुंचा रहा है, इसलिए उसे गर्भपात कराने की अनुमति दी जाए।

न्यायालय के पूर्व आदेश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर की टीम ने पीड़िता का परीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें गर्भ 14 से 16 सप्ताह का बताया गया था।

सर्वोच्च अदालत के फैसलों का हवाला
सुनवाई के दौरान जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने चिकित्सकीय गर्भ समापन अधिनियम, 2021 और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में पारित नजीरों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि यदि गर्भ का कारण बलात्कार है, तो उससे होने वाली मानसिक पीड़ा महिला के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चोट है और पीड़िता को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह गर्भ जारी रखे या नहीं।

Share on Google Plus

click XYZ

    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

Post a Comment