दशकों का अंधेरा छंटा -छत्तीसगढ़ के इस गांव में पहली बार पहुँचा राशन, खुशी से झूम उठे आदिवासी
बस्तर के अबूझमाड़ की दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसे गांव हितुल में विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी गई है, जिसने ग्रामीणों के दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'सुशासन' और जिला प्रशासन की संवेदनशीलता के फलस्वरूप, अब हितुल के ग्रामीणों को चावल के एक-एक दाने के लिए 30 किलोमीटर का जोखिमभरा पैदल सफर नहीं करना होगा।
ट्रैक्टर की घरघराहट के साथ पहुंची खुशहाली
ओरछा विकासखंड के थुलथुली पंचायत का आश्रित ग्राम हितुल लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा था। सबसे बड़ी चुनौती थी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का लाभ लेना। ग्रामीणों को राशन के लिए ओरछा तक दुर्गम रास्तों से होकर जाना पड़ता था, जो बुजुर्गों और महिलाओं के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था।
कलेक्टर की विशेष पहल से बदली तस्वीर
कलेक्टर नम्रता जैन की विशेष पहल पर प्रशासन ने इस बाधा को पार कर दिखाया। पहली बार दुर्गम रास्तों को चीरते हुए ट्रैक्टरों के माध्यम से राशन सीधे गांव तक पहुँचाया गया। गांव में ही आयोजित 'चावल उत्सव' के दौरान जब राशन का वितरण शुरू हुआ, तो ग्रामीणों के चेहरों पर संतोष और खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के 271 राशन कार्डधारी परिवारों को अब घर बैठे खाद्यान्न मिलेगा। इससे 30 किमी पैदल चलने की मजबूरी और समय की बर्बादी पूरी तरह खत्म हो गई है।
मुख्यधारा से जुड़ता अबूझमाड़
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होने से क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति तक शासन की पहुँच हुई है। जिला खाद्य अधिकारी अलाउद्दीन खान ने बताया कि प्रशासन का लक्ष्य केवल राशन पहुँचाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भौगोलिक चुनौतियाँ विकास के रास्ते में बाधा न बनें। हितुल में राशन की यह 'दस्तक' इस बात का प्रमाण है कि अबूझमाड़ अब मुख्यधारा से जुड़ने के लिए तैयार है।

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