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प्रदोष व्रत में एक छोटी-सी चूक कर सकती है पूजा को निष्फल

 प्रदोष व्रत में एक छोटी-सी चूक कर सकती है पूजा को निष्फल
 वैशाख माह का पहला प्रदोष व्रत 15 मार्च को किया जाएगा। जब प्रदोष व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तो इसे बुध प्रदोष कहा जाता है। बुधवार का दिन बुध ग्रह द्वारा शासित है। ऐसे में बुधवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत बुद्धि, वाणी तथा व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता प्राप्ति के लिए लाभकारी माना गया है। चलिए जानते हैं कि इस दिन पर आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।




बुध प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल को देर रात 12 बजकर 12 मिनट पर शुरू हो रही है। यह तिथि 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 31 मिनट तक रहने वाला है। ऐसे में इस दिन पर पूजा का मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहने वाला है -

प्रदोष पूजा मुहूर्त - शाम 6 बजकर 47 मिनट से रात 9 बजे तक

इन बातों का रखें खास ख्याल
प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय यानी प्रदोष काल में दुबारा पूजा करना अनिवार्य है, इसे न छोड़ें।
भगवान शिव की पूजा के दौरान मन और तन दोनों की पवित्रता का ध्यान रखें।
प्रदोष व्रत में नमक का सेवन न करें।
पूजा में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।

इन गलतियों से करें अपना बचाव
अगर प्रदोष व्रत के दिन आप ये गलतियां करते हैं, तो इससे आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
प्रदोष व्रत के दिन व्यक्ति को झूठ बोलने, क्रोध करने, वाद-विवाद करने या किसी का अपमान करने से बचें।
इस दिन पर तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का सेवन नहीं करना चाहिए।
पूजा के दौरान मन में नकारात्मक विचार न लाएं।
प्रदोष व्रत की पूजा में काले रंग के कपड़े पहनने से बचें।
इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।

शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये चीजें
प्रदोष व्रत की पूजा में शिवलिंग पर सिंदूर, हल्दी, तुलसी दल और केतकी के फूल अर्पित करने की गलती न करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव जी को सिंदूर, हल्दी, नारियल पानी व टूटे हुए चावल भी अर्पित नहीं करने चाहिए। ऐसा करना बिल्कुल भी शुभ नहीं माना गया, इससे आपको पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

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