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जीवन में किए गए ये 4 काम मृत्यु के बाद बचाते हैं यमलोक की सजा से

 जीवन में किए गए ये 4 काम मृत्यु के बाद बचाते हैं यमलोक की सजा से
हिंदू धर्म में 'गरुड़ पुराण' को एक बेहद ही महत्वपूर्ण और पवित्र ग्रंथ माना गया है। आमतौर पर लोग मृत्यु के नाम से ही डर जाते हैं, लेकिन गरुड़ पुराण केवल मृत्यु का डर नहीं दिखाता, बल्कि यह जीवन जीने की सही राह भी बताता है। इस महापुराण में जन्म, मृत्यु और मृत्यु के बाद आत्मा के सफर से जुड़े कई गहरे रहस्य विस्तार से समझाए गए हैं।




गरुड़ पुराण में स्वयं भगवान विष्णु और पक्षीराज गरुड़ के बीच हुए संवाद का वर्णन है। इसमें श्री हरि ने बताया है कि मृत्यु के बाद जीवात्मा को उसके कर्मों के अनुसार ही फल भुगतना पड़ता है।

लेकिन, भगवान विष्णु ने कुछ ऐसे शुभ कर्मों के बारे में भी बताया है, जिन्हें अगर इंसान अपने जीवनकाल में कर ले, तो उसे मृत्यु के बाद यमलोक की भयानक यातनाओं (कष्टों) का सामना नहीं करना पड़ता।

माता-पिता और गुरु की निस्वार्थ सेवा
गरुड़ पुराण स्पष्ट रूप से कहता है कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सच्चे मन से सेवा करता है और अपने गुरुजनों का सम्मान करता है, उसके लिए स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं। ऐसे लोगों को मृत्यु के बाद यमदूतों का भय नहीं रहता। उनके अच्छे कर्म जीवन में भी बरकत लाते हैं और मृत्यु के बाद भी उनकी रक्षा करते हैं।

दान-पुण्य और परोपकार की आदत
सनातन धर्म में दान का बहुत बड़ा महत्व है। निस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना एक महान कार्य है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति गरीबों को अन्न, वस्त्र या विद्या का दान करता है, उस पर देवी-देवताओं के साथ-साथ पितरों की भी कृपा बनी रहती है। ऐसे लोगों का परलोक हमेशा सुधर जाता है।

पवित्र तुलसी की पूजा और सेवा
सनातन परंपरा में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र और भगवान विष्णु का सबसे प्रिय माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति जीवन भर तुलसी माता की सेवा करता है, उनके आगे दीप जलाता है, अंत समय में उसके प्राण आसानी से निकलते हैं। मृत्यु के समय यमदूतों के बजाय विष्णुदूत ऐसे इंसान को लेने आते हैं और उसे यमलोक के कष्ट नहीं सहने पड़ते।

सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना
भगवान विष्णु पक्षीराज गरुड़ को बताते हैं कि जो इंसान कभी झूठ नहीं बोलता और हमेशा धर्म के रास्ते पर चलता है, वह इस लोक और परलोक दोनों जगह सम्मान पाता है। ऐसे सत्यवादी व्यक्ति को न तो जीवन में किसी बात का डर रहता है और न ही मृत्यु के बाद यमराज की यातनाओं का सामना करना पड़ता है।

गरुड़ पुराण का यह ज्ञान हमें सिखाता है कि हम अपने कर्मों को सुधारकर न सिर्फ अपना वर्तमान जीवन सुखमय बना सकते हैं, बल्कि अपनी मृत्यु के बाद की यात्रा को भी शांत और मंगलमय कर सकते हैं।

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