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युद्ध में अपहरण किए गए यूक्रेनी बच्चों को सैनिकों के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है रूस

 युद्ध में अपहरण किए गए यूक्रेनी बच्चों को सैनिकों के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है रूस

यूक्रेन ने रूस पर आरोप लगाया है कि उसने आक्रमण के दौरान यूक्रेनी बच्चों का अपहरण किया और उनके 18 साल के होने पर उन्हें जबरन अपनी सेना में शामिल कर के अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ने के लिए मजबूर किया। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ एंड्री बोरिसोविच यरमक ने यह आरोप लगाए है। यरमक का कहना है कि यह सब कुछ एक सोची-समझी सरकारी योजना का हिस्सा है और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इशारों पर हो रहा है।



रूसी मोर्चे पर मिल रहे युवा सैनिक

यरमक ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, यूक्रेन की सेना का सामना अब ऐसे सैनिकों से हो रहा है जो उम्र में काफ़ी छोटे हैं। इनमें से कई को नाबालिगों के रूप में रूस ले जाया गया था और फिर सालों तक कब्ज़े वाले इलाकों में इन्हें एक खास विचारधारा सिखाई गई और मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई।


व्लाद रुडेंको भी इन मामलों में से एक

ऐसा ही एक मामला 19 साल के व्लाद रुडेंको नाम के लड़के से जुड़ा है, जिसने एक अखबार को अपनी आपबीती सुनाई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें रोज़ रूसी राष्ट्रगान गाना पड़ता था और साथ ही कूदना, स्क्वाट करना, दौड़ना और रेंगने जैसे कठिन शारीरिक अभ्यास भी करने पड़ते थे। इसके साथ ही उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण भी दिया जाता था। रुडेंको ने आगे कहा कि, किशोरों को उनकी उम्र के हिसाब से अलग-अलग स्तर का प्रशिक्षण दिया जाता था। इसमें 16 और 17 साल के बच्चों को नकली राइफलें दी जाती थीं, जबकि बड़े बच्चों को असली गोलियों वाले हथियार इस्तेमाल करने को मिलते थे।


2022 में हुआ था रुडेंको का अपहरण

अक्टूबर 2022 में, जब रूसी सेना ने खेरसॉन पर कब्ज़ा किया था, तब उन्होंने बंदूक की नोक पर रुडेंको को उठा लिया था। उस समय उसकी उम्र सिर्फ 16 साल थी। इसके बाद उसे क्रीमिया ले जाया गया, जहां उसने एक री-एजुकेशन (पुनर्शिक्षा) सुविधा में तीन साल बिताए। लेकिन आखिरकार वह अपनी मां की मदद से वहां से भाग निकला और युद्ध-क्षेत्र को पार करके वापस अपने घर पहुंच गया।

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