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सफेद बाघों का फिर बसेरा बनेगा मध्य प्रदेश

 भोपाल। मध्य प्रदेश का संजय दुबरी टाइगर रिजर्व सीधी 71 साल बाद सफेद बाघों का बसेरा बनने जा रहा है। राज्य सरकार ने यहां सफेद बाघों को बसाने और उन्हें खुला जंगल देने की परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत ह्वाइट टाइगर सफारी एवं चिड़ियाघर मुकुंदपुर, रीवा में मौजूद एक जोड़ा सफेद बाघ और शावकों को वाइल्ड (जंगली) बनाकर सीधी के जंगल में छोड़ा जाएगा।

वर्तमान में सफेद बाघ खुले जंगल में नहीं हैं। मध्य प्रदेश के चिड़ियाघरों में छह और अन्य राज्यों के चिड़ियाघरों को मिलाकर देश में सिर्फ 108 सफेद बाघ हैं। वन विभाग दूसरे राज्यों आंध्र प्रदेश , छत्तीसगढ़, तमिलनाडू, तेलंगाना से भी युवा सफेद बाघ मांगने की तैयारी कर रहा है, ताकि अच्छे जीन (वंशाणु) के सफेद बाघ (शावक) जंगल में छोड़े जा सकें। शुरुआत में इन्हें बाड़ा बनाकर रखा जाएगा।

जब जंगल में रहने की आदत पड़ जाएगी और वे शिकार में माहिर हो जाएंगे, तब उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। इस परियोजना में पांच से सात साल लग सकते हैं। सफेद बाघ मध्य प्रदेश की विशेषता रही है। इस गौरव को पाने के लिए सरकार ने प्रयास शुरू किए हैं। परियोजना की सैद्धांतिक मंजूरी देते हुए वन विभाग से पूरी योजना मांगी गई है।

सीधी से ही दुनिया में पहुंचा सफेद बाघ

दुनिया का पहला सफेद बाघ सीधी के जंगल (अब-संजय दुबरी टाइगर रिजर्व) में मिला था। शिकार के दौरान चार जून 1951 को रीवा महाराज मार्तण्ड सिंह जूदेव की नजर सफेद बाघ (शावक) पर पड़ी थी। वे मांद (गुफा) में पिंजरा लगाकर शावक को गोविंदगढ़ किले में ले आए थे। बाद में इसी शावक का नाम 'मोहन' पड़ा। मोहन को किले में रखकर पाला गया। 19 साल की जिंदगी में बाघ मोहन एवं बाघिन राधा के 34 शावक हुए। इनमें से 21 सफेद थे। माना जाता है कि इसी बाघ की संतानें ब्रिटेन, अमेरिका, जापान सहित भारत के अन्य राज्यों में भेजी गईं।


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