.....

यूके होईकोर्ट ने विजय माल्या को दिवालिया घोषित किया

 विजय माल्या अपनी दिवालिया किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े 9,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण को जानबूझ कर न चुकाने के आरोपी हैं. हाईकोर्ट ने विजय माल्या को दिवालिया घोषित कर दिया है.



 यूके होईकोर्ट ने घोषित किया दिवालिया 
भारत के भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को यूके हाईकोर्ट से सोमवार को बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने विजय माल्या को दिवालिया घोषित कर दिया है. इसके बाद विजय माल्या की संपत्ति जब्त हो सकती है.  दोपहर 3 बजकर 42 मिनट पर मुख्य दिवाला और कंपनी न्यायालय (आईसीसी) के न्यायाधीश माइकल ब्रिग्स ने हाईकोर्ट में वर्चुअली सुनवाई के दौरान कहा- मैं डॉ. विजय माल्या को दिवालिया घोषित करता हूं.
 हजारों करोड़ रुपये है बकाया 
गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में एक कंसोर्टियम ने अप्रैल में लंदन हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भगोड़े व्यवसायी को दिवालिया घोषित किए जाने की पुरजोर कोशिश की थी. विजय माल्या पर बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के लिए, लिए गए ऋण के हजारों करोड़ रुपये बकाया है.
 बैंक से दिवालियापन घोषित नहीं कर सकते 
विजय माल्या का यह कहना था कि उसके ऊपर जो कर्ज बकाया है वे जनता का पैसा है.ऐसे में बैंक से दिवालियापन घोषित नहीं कर सकते हैं.इसके साथ ही माल्या ने यह भी दावा किया था कि भारतीय बैंकों की तरफ से दायर दिवालियापन याचिका कानून के दायरे से बाहर है. क्योंकि भारत में उनकी संपत्ति की सिक्योरिटी पर नहीं लगा सकते क्योंकि यह भारत में जनता के हित के खिलाफ है.
मुख्य दिवालिया एवं कंपनी अदालत (आईसीसी) में न्यायाधीश माइकल ब्रिग्स के समक्ष एक आभासी सुनवाई में दोनों पक्षों ने पिछले साल दायर दिवालिया याचिका में संशोधन के बाद मामले में अपनी अंतिम दलीलें दीं.
 इन बैंकों का ऋणी हैं माल्या 
सबीआई के अलावा बैंकों के इस समूह में बैंक ऑफ बड़ौदा, कॉरपोरेशन बैंक, फेडरल बैंक लिमिटेड, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंसट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं. जज ब्रिग्स ने कहा था कि वह अब विवरणों पर विचार करेंगे और आने वाले हफ्तों में उचित समय पर निर्णय देंगे. विजय माल्या अपनी दिवालिया किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े 9,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण को जानबूझ कर न चुकाने के आरोपी हैं.
Share on Google Plus

click vishvas shukla

    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

Post a Comment