Nobel Prize 2019: भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी को नोबेल के लिए चुना गया

स्टॉकहोम: जिस आदमी के पास पेट भरने को भोजन नहीं है, वह टीवी क्यों खरीदेगा? क्या ज्यादा बच्चे होना आपको ज्यादा गरीब बना देता है? अर्थव्यवस्था से जुड़े ऐसे ही कई जमीनी सवाल उठाने वाले और दो दशक से वैश्विक स्तर पर गरीबी से लड़ने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी और उनकी फ्रांसीसी पत्नी एस्थर डुफ्लो को इस साल अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए चुना गया है। उनके साथ अमेरिकी अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर भी विजेता चुने गए हैं।

 अर्थशास्त्र के नोबेल विजेताओं के एलान के साथ इस साल के नोबेल विजेताओं के नामों के एलान का क्रम भी पूरा हो गया। विजेताओं को 10 दिसंबर को पुरस्कार दिए जाएंगे। पीएम नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए कहा कि अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल जीतने पर बधाई। उन्होंने गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। मैं एस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर को भी नोबेल जीतने की बधाई देता हूं।

नोबेल पुरस्कारों की जिम्मेदारी संभालने वाली रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने कहा, 'इस साल अर्थशास्त्र के नोबेल विजेताओं ने जो शोध किया है, उससे वैश्विक गरीबी से निपटने की हमारी क्षमता उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। मात्र दो दशक में उनके प्रयोग आधारित नए तरीके ने विकास की अर्थव्यवस्था में आमूलचल बदलाव किया है, जो आज व्यापक शोध का विषय है।

उन्होंने वैश्विक गरीबी के खिलाफ भरोसेमंद जवाब खोजने का नया तरीका दिया है। उनकी खोज ने और इन पर काम करने वाले अन्य अर्थशास्‍त्रियों ने गरीबी से लड़ने की हमारी क्षमता को निखारा है। उन्होंने मुद्दे को छोटे और ज्यादा आसानी से समझे जा सकने वाले सवालों में बांटा है। आज भी 70 करोड़ से ज्यादा आबादी बहुत कम आय में गुजारा करती है। हर साल 50 लाख से ज्यादा बच्चे पांच साल की उम्र से पहले जान गंवा देते हैं। इनमें से ज्यादातर की जान ऐसी बीमारियों से जाती है, जिनसे अपेक्षाकृत कम खर्च वाले और साधारण इलाज से निपटा जा सकता है।

58 वर्षीय बनर्जी की शिक्षा यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से हुई है। वह फिलहाल एमआइटी में फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर ऑफ इकोनॉमिक्स के तौर पर जुड़े हैं। 1972 में जन्मी डुफ्लो एमआइटी के इकोनॉमिक्स विभाग में में अब्दुल लतीफ जमील प्रोफेसर ऑफ पॉवर्टी एलीविएशन एंड डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स के रूप में जुड़ी हैं। 54 वर्षीय क्रेमर एक डेवलपमेंट इकोनॉमिस्ट हैं और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में गेट्स प्रोफेसर ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज के तौर पर कार्यरत हैं। पुरस्कार के तौर पर मिलने वाली 90 लाख स्वीडिश क्रोनर (करीब 6.46 करोड़ रुपये) की राशि को तीनों विजेताओं में बराबर बांटा जाएगा।
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