TMC के एक और MLA समेत कई नेता BJP में शामिल

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस को 24 घंटे के भीतर दूसरा बड़ा झटका लगा है। TMC के विधायक मुनीरुल इस्लाम बुधवार को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। 

उनके साथ TMC के वरिष्ठ नेता गदाधर हाजरा, मोहम्मद आसिफ इकबाल और निमई दास ने भी बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।

 इतना ही नहीं, बीजेपी का दावा है कि अगले कुछ दिनों में टीएमसी के 6 और विधायक पार्टी का दामन थाम सकते हैं।

 नेताओं के लगातार पलायन से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ गई है। मंगलवार को उनकी पार्टी के एक विधायक और बड़ी संख्या में पार्षद बीजेपी में शामिल हुए थे। 

उनके साथ कांग्रेस और CPI (M) के 1-1 विधायक ने भी बीजेपी का दामन थामा था। बुधवार को बीजेपी में आए मुनीरुल वीरभूमि जिले के लबपुर विधानसभा से टीएमसी के विधायक हैं।

 उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी में शामिल कराया। वहीं, गदाधर हाजरा TMC के वीरभूमि जिले के ही युवा विंग के अध्यक्ष और पूर्व में विधायक रहे हैं।प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि बंगाल के भीतर जिस प्रकार से आतंक वाली राजनीति चल रही है, उससे TMC के भीतर भी काफी रोष है।

 उन्होंने कहा, 'दीदी (ममता बनर्जी) के अहंकार के कारण वहां काम करने में लोगों का दम घुट रहा है इसलिए बड़ी संख्या में लोगों का विश्वास पीएम मोदी पर बढ़ रहा है।' 

बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय ने कहा कि आज अल्पसंख्यकों के भीतर से आवाज उठ रही है और आगे इस समुदाय के कई एमएलए और सांसद बीजेपी में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि ये लोग सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के संकल्प को मानते हुए बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। 

यह खबर ऐसे समय में सामने आई जब कुछ देर पहले ही ममता बनर्जी ने पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के अपने फैसले को बदल दिया। उन्होंने शपथ समारोह में बीजेपी पर सियासत करने का आरोप लगाया। ममता ने बयान में कहा कि अब वह इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगी क्योंकि इसका राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल हो रहा है। 

आपको बता दें कि एक तरफ टीएमसी से नेता बीजेपी में आ रहे हैं वहीं, पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बंगाल में राजनीतिक हिंसा के दौरान मारे गए पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों को भी आमंत्रित किया गया है। शायद इसी वजह से ममता ने शपथ समारोह में शामिल न होने का फैसला किया। 
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