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भारत में कम हुई गरीबी, हर 1 मिनट में गरीबी रेखा से बाहर आ रहे 44 भारतीय :रिपोर्ट

नई दिल्ली : देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी, जनता पार्टी की सरकार को आम चुनाव में हराने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया था.
 इस नारे के दम पर ही आपातकाल के ‘दाग’ के बावजूद इंदिरा गांधी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौट आई थीं. लेकिन 1980 के दशक के शुरुआती वर्षों में इस नारे के बावजूद, देश से गरीबी नहीं मिटी. 
लेकिन अब ‘मिट’ रही है. जी हां, टाइम्स ऑफ इंडिया में ब्रूकिंग्स के ‘फ्यूचर डेवलपमेंट’ ब्लॉग के हवाले से छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर 1 मिनट में 44 लोग गरीबी रेखा से बाहर हो रहे हैं. 
इस कारण भारत में पिछले कुछ वर्षों में गरीबी कम हुई है. अब दुनिया में गरीब देशों की लिस्ट में नाइजीरिया सबसे टॉप पर है.
 इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो भारत साल के अंत तक इस लिस्ट में खिसककर दूसरे स्थान पर कांगो के बाद तीसरे नंबर पर आ जाएगा.
‘फ्यूचर डेवलपमेंट’ रिपोर्ट के अनुसार भारत के मुकाबले नाइजीरिया में प्रति मिनट गरीबी रेखा से बाहर निकलने वालों की संख्या बहुत कम है. नाइजीरिया में 1 मिनट में सिर्फ 6 लोग ही गरीबी रेखा से बाहर हो रहे हैं, वहीं भारत में यह आंकड़ा 44 का है.
 रिपोर्ट के अनुसार, ‘मई 2018 में किए गए अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलकर सामने आया कि नाइजीरिया में अब भी 8.7 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे अपना जीवन बसर कर रहे हैं.
 वहीं भारत में यह संख्या अब 73 मिलियन यानी 7.3 करोड़ रह गई है.’ पिछले साल बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 1990 के बाद हुए प्रगति और विकास कार्यों ने गरीबी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है. लेकिन अब भी इस दिशा में कई कदम उठाया जाना बाकी है.
दुनिया के सभी अविकसित और विकासशील देशों में गरीबी मिटाने की दिशा में संयुक्त राष्ट्रसंघ पिछले कई वर्षों से काम कर रहा है. संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम, सतत विकास लक्ष्य यानी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के तहत वर्ष 2030 तक दुनिया से गरीबी मिटाने का लक्ष्य रखा गया है.
 ‘फ्यूचर डेवलपमेंट’ रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों में प्रगति और विकास कार्यों की तेज रफ्तार से गरीबी कम होने का अनुमान है. इसमें भारत, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, फिलीपींस, चीन और पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी की ऊंची दर काफी मददगार साबित होगी.
‘फ्यूचर डेवलपमेंट’ रिपोर्ट के अनुसार अफ्रीकी देशों में सबसे ज्यादा गरीबी है. यह पूरी दुनिया का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है. अध्ययन मॉडल का अनुमान है कि 1 सितंबर 2017 को विश्व में 647 मिलियन यानी 64.7 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे थे. 
अभी दुनिया में हर 1 मिनट में 70 यानी प्रति सेकेंड 1.2 लोग गरीबी रेखा से बाहर आ रहे हैं. यह सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के लक्ष्य (92 लोग प्रति मिनट या 1.5 प्रति सेकेंड) के करीब है. रिपोर्ट के अनुसार गरीबी रेखा से बाहर आने वालों की इस संख्या के आधार पर हम अनुमान लगा सकते हैं कि वर्ष 2016 में 36 मिलियन यानी 3.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आ गए थे.
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