SC की गूगल, याहू और माइक्रोसॉफ्ट को कड़ी फटकार, जल्द हटाओ लिंग जांच का विज्ञापन

लिंग परीक्षण से जुड़े विज्ञापन दिखाने पर टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल, याहू और माइक्रोसॉफ्ट को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। 
सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि इन तीनों कंपनियों को भारतीय कानून की कोई कद्र नहीं है। कोर्ट ने इन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वह लिंग परीक्षण से जुड़े कॉन्टेंट को बैन करने के लिए एक आंतरिक विशेषज्ञ समिति बनाए। 
यह पैनल गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग जांच से जुड़े आपत्तिजनक शब्दों की पहचान कर उससे जुड़ी चीजें दिखाने से रोकेगा।
कोर्ट ने लिंग परीक्षण से संबंधी विज्ञापनों और अन्य सामग्रियों की समीक्षा करते हुए इन पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश जारी किया है। 
अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने लिंग परीक्षण संबंधी ऑनलाइन विज्ञापन देने के साथ ही उससे संबंधित सामग्रियां परोसने वाली इन तीनों कंपनियों को निर्देश देते हुए कहा है कि लिंग परीक्षण से संबंधित विज्ञापन और परोसी जा रही सामग्रियां भारत में लागू कानून का उल्लंघन करती हैं। 
कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा है कि ये तीनों कंपनियां तत्काल प्रभाव से इन विज्ञापनों और सामग्रियों के ऑनलाइन प्रचार से हटाएं।
कोर्ट ने दूसरे देशों में ऐसे ही कॉन्टेंट बैन होने का उदाहरण दिया। कोर्ट ने इन कंपनियों से भारतीय कानून के प्रति उत्तरदायी होने की बात कही है। 
कोर्ट का कहना है कि जब दूसरे देशों में ये कॉन्टेंट बैन है तो भारत से क्यों नहीं हो सकता? एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीनों कंपनियों से कहा, ‘आप किसी देश के कानून का उल्लंघन नहीं कर सकते।
 भारतीय कानून के प्रति आपको उत्तरदायी होना होगा।’ कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सभी कंपनियों के वकीलों ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वो हर हाल में भारतीय कानून का सम्मान और पालन करते रहेंगे।
गूगल की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील ने बताया कि हम पहले ही काफी आपत्तिजनक सामग्री हटा चुके हैं। 
हालांकि गूगल के इस दावे पर सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने आपत्ति जताई और कोर्ट में अपने मोबाइल पर गूगल के इस दावे को झुठलाते हुए कुछ शब्द डाल कर सर्च रिजल्ट कोर्ट को दिखाया और कहा कि अभी तक गूगल और अन्य कंपनियां ने कुछ भी ठोस नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से नोडल एजेंसी के बारे में लोगों को बताने को कहा है ताकि लोग इसके बारे में जान सकें और सीधे नोडल एजेंसी तक आ सकें। 
अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अप्रैल को होगी। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट तीनों कंपनियों को कई बार फटकार लगा चुका है और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दे चुका है।
पिछले साल दो जजों की एक बेंच ने भी गूगल इंडिया, याहू इंडिया और माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को लिंग परीक्षण से जुड़े कंटेंट्स को शिकायत को 36 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया था। 
मार्च 2015 में कोर्ट ने इन तीनों कंपनियों को निर्देश दिया था कि प्री कॉन्सेप्शन और प्री नैटल डाइगनोस्टिक टेक्निक एक्ट 1994 का उल्लंघन करने वाले किसी भी विज्ञापन को न चलाए।
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