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आटो कंपनियां चिप की कमी का स्थाई समाधान निकालने में जुटीं

 

कोरोना महामारी काल के दौरान दुनियाभर में पैदा हुई सेमीकंडक्टर (चिप) की समस्या कम होनी शुरू ही हुई थी कि रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन-ताइवान-अमेरिका के बीच पैदा हुए तनाव ने नई मुसीबत पैदा कर दी। ऐसे में देश की आटोमोबाइल कंपनियों ने चिप की कमी को दूर करने के लिए अपने स्तर पर स्थाई समाधान निकालने की कोशिश तेज कर दी हैं। टाटा मोटर्स के इंजीनियर जहां सिर्फ एक ही चिप के माध्यम से पूरी गाड़ी चलाने की सुविधा पर काम कर रहे हैं।


वहीं सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी अपने वाहनों की डिजाइन पर काम कर रही है ताकि भविष्य में ज्यादा चिप की जरूरत ही नहीं पड़े। इसके अलावा हुंडई और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियां किसी एक स्रोत की जगह अलग-अलग चिप आपूर्ति करने वाले वेंडरों पर निर्भरता बढ़ा रही हैं। इसका फायदा यह मिलेगा कि अगर भविष्य में किसी एक देश में समस्या पैदा होती है तो पूरी आपूर्ति के लड़खड़ाने का खतरा नहीं रहेगा।

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