SBI समेत सिर्फ ये 4 बैंक रह जाएंगे सरकारी, इन बैंकों के निजीकरण की राह पर बढ़ेगी

  

बैंकों के निजीकरण के लिए मोदी सरकार 1970 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के लिए बने कानून बैंकिंग कंपनीज ऐक्ट को निरस्त कर सकती है। ऐसा करना सरकार के लिए मुश्किल भी नहीं होगा क्योंकि संसद के दोनों सदनों से वह बिल को पारित कराने में सक्षम है।बैंकिंग सेक्टर में सरकार जल्दी ही निजीकरण की राह पर तेजी से आगे बढ़ सकती है। नीति आयोग ने बैंकों के निजीकरण का ब्लूप्रिंट भी तैयार कर लिया है। आयोग ने केंद्र सरकार को 4 सरकारी बैंकों पर ही अपना नियंत्रण रखने का सुझाव दिया है। इन बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक शामिल हैं। 



इसके अलावा आयोग ने तीन छोटे सरकारी बैंकों पंजाब ऐंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूको बैंक का प्राथमिकता के आधार पर निजीकरण करने की सलाह दी है। अन्य सरकारी बैंकों (बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक और इंडियन बैंक) का सरकार या तो 4 बचे हुए बैंकों में विलय करेगी या फिर उनमें हिस्सेदारी घटाएगी। इन बैंकों में सरकार अपनी हिस्सेदारी को 26 पर्सेंट तक सीमित कर सकती है।


दरअसल पिछले दिनों निजीकरण के लिहाज से केंद्र सरकार ने स्ट्रेटेजिक और नॉन-स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स तय किए थे। इसके मुताबिक बैंकिंग भी स्ट्रेटेजिक सेक्टर में है और अधिकतर 4 सरकारी संस्थाओं को ही इसमें मंजूरी दी जा सकती है। ऐसे में स्पष्ट है कि सरकार 4 बैंकों को ही अपने पास रखेगी। इस प्रस्ताव को जल्दी ही कैबिनेट के समक्ष पेश किया जा सकता है। बैंकों के निजीकरण को जरूरी बताते हुए एक सरकारी सूत्र ने कहा कि 31 अगस्त तक लागू किए गए मोराटोरियम और फिर 2 साल के लिए कर्जों के पुनर्गठन के बाद बैंकों में बड़े पैमाने पर पूंजी के निवेश की जरूरत है।

Share on Google Plus

click vishvas shukla

    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 comments:

Post a comment