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अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों ने सीरिया पर किया हमला

सीरिया में संदिग्ध रासायनिक हमलों के जवाब में की गई अमेरिकी कार्रवाई से दुनिया के कई देश दो धड़ों में बंट गए हैं। एक धड़ा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ खड़ा नजर आता है तो दूसरा असद के समर्थन में रूस के साथ सुर मिला रहा है। 
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद को अभी इतने बड़े रूप में नहीं देखा जा रहा कि विश्वयुद्ध जैसे हालात पैदा हो सकें।
फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, तुर्की, जॉर्डन, सऊदी अरब, इटली, जापान, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड्स, इजरायल, स्पेन समेत कई देश अमेरिका के साथ हैं। रूस, ईरान और चीन सीरिया की असद सरकार को समर्थन दे रहे हैं।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने कहा कि सीरियाई सरकार की रासायनिक हथियारों के उत्पादन और उनके इस्तेमाल की क्षमता को लक्ष्य बनाकर ये हमले किए गए हैं।
 हम रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को बर्दाश्त नहीं कर सकते। फ्रांस ने मई 2017 में जो लक्ष्मण रेखा खीचीं थी उसे लांघा गया है। इसलिए मैंने फ्रांसीसी सेना को अभियान में शामिल होने का निर्देश दिया।
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