एक बार फिर प्रदेश सरकार कर्ज लेने की तैयारी मे !



भोपाल! कमलनाथ सरकार सत्ता में आने के बाद से लगातार आर्थिक तंगी से जूझ रही है। राज्य सरकार इस बार बाज़ार से कर्ज ले रही है। एक साल के भीतर कमलनाथ सरकार 6वीं बार कर्ज लेने जी रही है। सरकार बाज़ार से एक हज़ार करोड़ का कर्ज ले रही है। सरकार दस साल के लिए यह कर्ज ले रही है। इससे पहले 4 सितंबर को दो हज़ार करोड़ का कर्ज लिया गया था।
प्रदेश में लगातार कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। सरकार के आर्थिक तंगी के कारण विकास कार्यों को पूरा करने में पिछड़ रही है। इस बार एक हाज़ार करोड़ का कर्ज सरकार खुले बाज़ार से उठा रही है। इसके पीछे सरकार का तर्क है कि विकासकार्यों और जनहित कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए यह कर्ज लिया जा रहा है। शिवराज सरकार के समय से अब तक प्रदेश पर करीब पौने दो लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। एक साल होने को है लेकिन प्रदेश भर के किसानों का कर्ज अब तक आर्थिक तंगी की वजह से अटका हुआ है। वहीं, मानसून ने भी सरकार को इस बार मजबूर कर दिया है। प्रदेश में बारिश से सड़कों और फसलों को भारी नुकसान हुआ है। राज्य सरकार का आरोप है कि उसे केंद्र सरकार से भी राहत राशि की सहायता नहीं मिल रही है। ऐसे में उसे अपने ही मद से इन सब चुनौतियों से निपटना पड़ रहा है।
फिजुलखर्ची पर कटौती
कमलनाथ सरकार ने सत्ता में आने के बाद वित्तीय संकट से निपटने के लिए सबसे पहले फिजुलखर्ची पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसी सिलसिले में सरकार ने पेट्रोल-डीजल और शराब पर 5 फीसदी वैट भी बढ़ाया। लेकिन किसान कर्जमाफी, किसानों को गेहूं का बोनस और खराब सड़कों को सुधारना सरकार के लिए बजट के लिहाज से बड़ी चुनौती बने हुए हैं. यही वजह है कि सरकार को एक बार फिर बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है।

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