ट्रंप ने माना कि भारत आतंकवाद से पीड़ित है


पहली विदेश यात्रा पर सऊदी अरब पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को रियाद में 40 से ज़्यादा मुस्लिम देशों के नेताओं को संबोधित किया. उन्होंने कहा, आतंकवाद से दुनिया के कई पीड़ित हैं.
 कुछ देश आतंक को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. इससे मध्य-पूर्व से लेकर भारत, अमेरिका, चीन और रूस जैसे देश भी प्रभावित हो रहे हैं. धर्म के नाम पर आतंकवाद का खेल अब बंद होना चाहिए.
अपनी कट्‌टर शैली से उलट सधे हुए शब्दों में दिए गए अपने संबोधन में ट्रंप ने मुस्लिम देशों के नेताओं से आतंकवाद ख़त्म करने की अपील की. उन्होंने कहा, अमेरिका का लक्ष्य शांति, सुरक्षा और संपन्नता है. मैं दोस्ती, उम्मीद और प्यार का संदेश लेकर आया हूं. मैं किसी पर कुछ थोपने नहीं आया हूं बल्कि साझेदारी बढ़ाने आया हूं. बड़े मुस्लिम देशों को इस्लामिक अतिवाद से लड़ने के लिए आगे आना होगा.’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अमेरिका शांति और सुरक्षा चाहता है. मैं चाहता हूं कि मुस्लिम युवा भी बिना डर के रहें और आगे बढ़ें. 
मध्य पूर्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक रूप से काफी संपन्न है मगर आतंकवाद के कारण सारी चीज़ें पीछे छूट जाती हैं. जो आतंकवाद को वित्तीय मदद पहुंचा रहे हैं, उन्हें यह बंद करना होगा. हम मध्य-पूर्व में आतंकवाद से लड़ने के लिए सहयोग चाहते हैं. मुस्लिम देश अतिवादियों को प्रश्रय देना बंद करें.
सऊदी अरब की मेहमानवाज़ी को शानदार बताते हुए ट्रंप ने कहा, किंग सलमान के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध अच्छे हुए हैं. ’दोनों देशों के बीच जो समझौता हुआ है, उससे रोज़गार पैदा होगा. अतिवाद से भी लड़ने में मदद मिलेगी.
 ट्रंप ने ईरान पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, ईरान सामुदायिक हिंसा को बढ़ावा दे रहा है. साथ ही इस इलाक़े में अस्थिरता फैलाने की कोशिश भी कर रहा है.
हालांकि इस पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया में ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने सऊदी अरब को ‘लोकतंत्र और उदारवाद का गढ़’ बताते हुए तंज कसा.
 साथ ही ट्रंप के भाषण का एक हिस्सा ट्वीट करते हुए लिखा, अभी-अभी चुनावों से फ़ारिग़ हुए ईरान पर अमरीका ने ‘लोकतंत्र और उदारवाद के गढ़  से हमला किया है. यह विदेश नीति है या 480 बिलियन डॉलर के लिए सऊदी अरब का दोहन है.
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