पौधारोपण अभियान : CM शिवराज सिंह ने ओंकार पर्वत पर किया पौधारोपण



भोपाल : मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने सपत्नीक खण्डवा जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर में स्थित ओंकार पर्वत पर माँ आनंदमयी आश्रम परिसर में नवग्रहों के प्रतीक पौधों का रोपण कर वृहद वृक्षारोपण के महा अभियान में भागीदारी की।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने घोषणा की कि अगले वर्ष भी पौध रोपण महाअभियान चलाया जायेगा। आज रोपे गए पौधों के संरक्षण और देखभाल के लिए पौध रक्षकों की व्यवस्था की जायेगी।

आज पुण्य-सलिला माँ नर्मदा मैया के तट पर लगभग ३६ हजार पौधों का एक दिन में ही रोपण कर ओंकार पर्वत को हरियाली चूनर ओढ़ाई गई।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उपस्थित जन-समुदाय से कहा कि पेड़ हमें जिंदगी देते है और जिंदगी देने वाला भगवान होता है। इस रूप में पेड़ हमारे लिए भगवान स्वरूप है।

उन्होंने कहा कि पेड़ जीवन के लिए सबसे बहुमूल्य ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और हमारे द्वारा छोड़ी गई हानिकारक गैस कार्बन डाई आक्साइड को स्वयं ग्रहण करते हैं। पौधे लगाकर हम धरती के पर्यावरण को ही नहीं बल्कि दुनिया और मानव मात्र को बचाने का भी प्रयास कर रहे है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि धरती माँ का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में पेरिस में दुनिया भर के राजनेताओं के सम्मेलन में बताया गया कि वर्ष २०५० तक धरती का तापमान २ डिग्री सेल्सियस बढ़ जायेगा।

इससे गर्मी तो बढ़ेगी ही, साथ ही पर्वतों के ग्लेशियर पिघलने से समुद्र का जल-स्तर बढ़ जायेगा। कई द्वीप व टापू समुद्र में डूब जायेंगे। इससे वर्षा भी अनियमित होगी। इसलिए यह जरूरी है कि धरती का तापमान न बढ़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के अन्य देशों के साथ ही भारत ने भी यह संकल्प लिया है कि धरती का तापमान नहीं बढ़ने देंगे और तापमान कम करने के लिए पेड़ लगाना जरूरी है।

मध्यप्रदेश ने आज के दिन करोड़ों की संख्या में पेड़ लगाकर धरती और दुनिया को बचाने के भारत के संकल्प को पूरा करने में महती योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मुझे खुशी है कि प्रदेश की जनता ने वृहद वृक्षारोपण अभियान को जनोत्सव का रूप दिया। पेड़ लगाने के लिए हर वर्ग और समुदाय के साथ ही धार्मिक, सामाजिक, स्वैच्छिक संगठन, जन-प्रतिनिधि, अधिकारी तथा कर्मचारी आगे आये और पेड़ लगाने का नया इतिहास रचा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि माँ नर्मदा सतपुड़ा और विध्यांचल पर्वत के जंगलों के पेड़ों की जड़ों द्वारा वर्षा के दौरान अवशोषित जल को बूँद-बूँद कर छोड़ने से बनी धारा के रूप में बहती है।

नर्मदा माँ की धारा सतत अविरल बहती रहे, इसलिए 'नमामि देवि नर्मदे''-सेवा यात्रा के दौरान यह संकल्प लिया था कि नर्मदा के दोनों तट पर व्यापक वृक्षारोपण किया जाये।

आज मुझे खुशी है कि प्रदेश की जनता ने वृक्षारोपण अभियान को व्यापक समर्थन दिया। करोड़ों की संख्या में नर्मदा बेसिन में पौधों को रोप कर प्रदेश सरकार के संकल्प को पूरा करने में अपना योगदान दिया।
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