दुनिया का एकमात्र दो भागों में विभाजित शिवलिंग

इंदौरा उपमंडल में है काठगढ़ महादेव मंदिर। इंदौरा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले मे है। यहां दुनिया का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है जो दो भागों में बंटा हुआ है। इस शिवलिंग को अर्धनारीश्वर शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है।
इस शिवलिंग से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह है कि यह शिवलिंग घटता-बढ़ता रहता है। यह चमत्कार ग्रीष्म ऋतु और शरद ऋतु के दौरान होता है। किंवदंतियों को मानें तो ऐसा ग्रहों और नक्षत्रों के कारण होता है।
शिवलिंग घटता-बढ़ता रहता है। जो दो भागों में बंटा हुआ है। शिवलिंग के दोनों भाग महाशिवरात्रि पर एक हो जाते हैं। 
यह शिवलिंग हल्का काले रंग-भूरे रंग का है। जिसकी ऊंचाई एक भाग 7 फुट और दूसरा भाग 6 फुट है। 
 इतिहास में वर्णित है कि सिकंदर 326 ईसा पूर्व जब पंजाब पहुंचा तो उसने मूरथल गांव में 5000 सैनिकों को खुले मैदान में विश्राम करने की सलाह दी। तब इसी स्थान पर एक बाबा जी शिवलिंग की पूजा कर रहे थे। 
सिकंदर ने बाबाजी से कहा आप मेरे साथ यूनान चलें। मैं आपको दुनिया का हर ऐश्वर्य दूंगा। फकीर ने सिकंदर की बात को अनसुना करते हुए कहा, आप थोड़ा पीछे हट जाएं और सूर्य का प्रकाश मेरे तक आने दें।
बाबा जी की इस बात से प्रभावित होकर सिकंदर ने टीले पर काठगढ़ महादेव का मंदिर बनाने के लिए भूमि को समतल करवाया और चारदीवारी बनवाई। 
 इस चारदीवारी के व्यास नदी की ओर अष्टकोणीय चबूतरे बनवाए, जो वर्तमान में यहां मौजूद हैं।
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